About

मानवाधिकार सुरक्षा संघ में आपका स्वागत है
आचार्य आनन्द पंडित
संस्थापक

मानवाधिकार सुरक्षा संघ

एक पारिवारिक संगठन है जो स्वंय सहायता समूह के तर्ज इज कार्य करती है यह संगठन उन लोगों के उत्थान के लिए हमेशा तत्पर है जो लोग कुछ करने की हिम्मत और भावना रखते  है जरूरत मंद और मेहनत कश लोगों का हम संगठन में स्वागत करते है इस संगठन से वही लोग जुड़ें जो संगठन की विचारधारा से पूर्ण रूप से सहमत हों इस संगठन से जुड़ने के लिए कुछ शर्तें है जिनमें तीन प्रमुख है

१. संगठन से जुड़ने के लिए 1100/- रू. का अनुदान देना होगा जो की आजीवन सदस्यता अनुदान   होगा .

२. आप को संगठन को  प्रभावशाली बनाने और  मानव कल्याण हेतु ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों को संगठन से जोड़ने के लिए प्रयास रत रहना होगा.  

३. आप को संगठन से  जुड़े हुए सभी सदस्य को अपने परिवार का हिस्सा मानते  हुए सदस्यों के किसी भी तरह की तकलीफ में यथा सम्भव आर्थिक व् शारीरिक रूप से बिना किसी भेदभाव उपलब्ध रहना होगा और यथा संभव मदद करना होगा .

संगठन का मुख्य उद्देश्य :-

१.सामाजिक एवम आर्थिक उत्थान ,२.सामाजिक एवम असामाजिक तत्वों से सुरक्षा ,३.मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता ,

आपस में एक दूसरे की मदद करना भाईचारा बढ़ाना समाज में व्याप्त अन्धविश्वासों और कुरीतियों को ख़त्म करने की  पुरजोर कोशिस करना सामाजिक व् आर्थिक संकट के समय साथ साथ रहकर यथा सम्भव मदद करना आदि प्रमुख कार्य है ,

सामाजिक एवम आर्थिक उत्थान :-

के अंतर्गत हमें कोशिस करनी  है कि हम कभी भी ऐसी वाणी व् भाषा का प्रयोग न  करें जिससे की दूसरी जाति या धर्म का इन्सान अपने को  को अपमानित  महसूस करें अगर हम नौकरी या व्वसाय करते है तो हमें कोशिस करनी है की हमारे कर्म स्थल पर कोई जगह खाली होती है तो हमें अपने संगठन से जुड़े बेरोजगार भाई बहनों को काम दिलाने की पुरजोर कोशिस करें जिससे की वो लोग भी सर उठा कर सम्मान से जीवन यापन कर सकें .

सामाजिक एवम असामाजिक तत्वों से सुरक्षा :- 

के अंतर्गत  हमें कोशिस करनी है की हम  सब मिलकर संगठन में ज्यादा ज्यादा लोगों को जोड़ें और एक ऐसा सुरक्षा चक्र तैयार करें दृढ निश्चय करें की अगर अपने संगठन के   किसी भी भाई बहन को अकारण पुलिस परेशान करती है या पकड़ कर थाने ले जाती है या कोई माफिया गुंडा परेसान करे तो  यथा संभव ज्यादा से ज्यादा सख्या में एकत्र होकर इस हो रहे अत्याचार का पुरजोर विरोध करना ,

अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता :- 

मानव होने के नाते हमारे कुछ  कर्तव्य और अधिकार भी है इस लिए हमें  कोशिस करनी है  की हम सब मिलकर कानून व्यवस्था और सामाजिकता  से जुडी कोई भी जानकारी रखते है तो आपस में एक दूसरे को  आदान प्रदान करे और जागरूक करें  ,

सहयोग करने का तरीका :-

यदि संगठन के किसी भी सदस्य से साथ कोई दुर्घटना घटित होती है तो हम सब मिलकर यथा सम्भव स्वेच्छा से अनुदान देकर घटना ग्रस्त भाई बहन की आर्थिक सामाजिक व् शारीरिक मदद करेंगे ,

हमारा लक्ष्य है :-

  • हम अपने दुःख और सपनो की  साझेदारी करें एक दूसरे के सुख – दुःख  में भागीदारी निभाएं नेता व् नौकर शाह देश के प्रति जबाबदेह हो,
  • कुछ थोड़े से लोगों की mनमानी न चलने दें ,
  • धर्म जाति के नाम पर खून बहाने वाले देश को लूटने वालों के खिलाफ संघर्ष छेड़ें हम यासे समाज के लिए दृढ संकल्प है जन्हा किसी का शोषण न हो जन्हा धर्म जाती भाषा प्रान्त के आधार पर इन्सान इन्सान को न बांटे ,
  • जहाँ आपस में प्रेम सहयोग सहचरी सद्भावना परवान चढ़े शांतिमय माहोल हो जहाँ हर नारी का सम्मान हो बड़ों का आदर सत्कार हो माता पिता और गुरुजन पूज्यनीय हों
  • युवा वर्ग शक्तिशाली और आत्मनिर्भर बनें ,
  • हमारा आन्दोलन जनता के बुनियादी हक़ और जनशक्ति के आस्तित्व के लिए है , ​

दोहरी व्यवस्था अभद्रता बेईमानी भ्रष्टाचारअन्याय आव्य्वस्था साम्प्रदायिकता के विरुद्ध प्रेम सहयोग सद्भावना सामाजिक समानता और ​सुरक्षा के लिए हमें ही कुछ करना होगा अपने समाज के बदलाव के लिए कोई मशीहा   नही आएगा ,

आप मानवाधिकार सुरक्षा संघ के सम्मानित कार्यकर्त्ता  है :- 

संगठन को और प्रभावशाली बनाने के उद्देश्य से जब लोगों को संगठन से जुड़ने के लिए निमंत्रण देते है तो कुछ न समझ लोग सवाल करते है की हमें जुड़ने से क्या फ़ायदा होगा ,

मेरे भाइयों :-

संगठन  यानि काफी लोगों का समूह जो आप का और आप के लिए  है, सगठन यानि एक ताकत, सगठन यानि एक पहचान, संगठन यानि समाज बदलाव का संकेत, संगठन यानि आपकी सुरक्षा, मेरे आदरणीय मित्रों संघर्ष अकेले करने वाला थक हार कर बैठ जाता है जबकि संगठन के साथ संघर्ष करने से आपका मनोबल कभी नहीं टूटता इस लिए जो लोग समाज में सम्मान से जीना चाहते है पहचान सुरक्षा सहयोग चाहते है वो आपके परिवार में जुड़ने और उसके विस्तार में कोई कसार नहीं छोड़ेंगे वाही संगठित परिवार का सच्चा साथी होगा,